Tuesday, August 8, 2023

Poem on Uttarakhand by Sanjeev Manral

शिव के केदार और विष्णु के बद्री। 
गंगा यमुना और बहने ग्लैशरो से जन्मी। 

हेमकुंड और फूलो की घाटी है इसकी शान। 
नंदा देवी और पंचाचूली खड़े हैं सीना तान। 

वन्य प्राणियों के लिए हैं ६ राष्ट्रीय उद्यान। 
रहते हैं उनमे कस्तूरी मृग हाथी और बाग़। 

योग और अद्यात्म के केंद्र जहाँ। 
तीन युगो से जल रही ज्ञान की ज्योत यहाँ। 

चिपको आंदोलन ने दी पर्यावरण की शिक्षा। 
सपूतो ने की सीमा पर देश की रक्षा। 

ब्रह्म कमल बुरांश मोनल काफल।
पर्यटकों के लिए साहसिक खेल और ताल। 

देवो ने इसे देव भूमि बनाया। 
उत्तर खण्ड नाम पुराणों से पाया। 
 
 - संजीव मनराल

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